Monday, October 12, 2009

निशाने पर दूतावास

काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए आतंककारी हमले से अफगानिस्तान में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा की चिंता बढ गई है। वहां भारतीयों में दूतावास कर्मचारियों के अलावा विभिन्न विकास परियोजनाओं पर कार्यरत लोग भी हैं। इस आतंककारी हमले में बडी तादाद में अफगान नागरिक मारे गए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भारतीय दूतावास पर हमले की भत्र्सना की है। सुरक्षा परिषद ने भी हमले को 'निंदनीय' बताते हुए इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। तालिबान ने अपनी वेबसाइट पर कहा है कि उनके एक मरजीवडे ने भारी सुरक्षा बंदोबस्त वाले राजनयिक क्षेत्र में कार बम से आत्मघाती हमला किया था और उसके 'निशाने पर मुख्य रू प से भारत का दूतावास' था।काबुल में भारतीय दूतावास के बाहर पिछले गुरूवार को फटे इस विशाल बम के कारण 17 लोगों की मृत्यु हो गई और 76 घायल हो गए थे। दूतावास पर यह दूसरा हमला है, जिससे वहां सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है। साथ ही इन हमलों में तालिबान और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। तालिबान ने हालांकि हमले की जिम्मेदारी ओढी है, लेकिन अफगान सरकार ने कहा है कि विदेशी सहायता के बिना ऎसा हमला सम्भव नहीं था। पिछले साल भारतीय दूतावास पर हुए हमले में 58 लोग मारे गए थे। उसके बाद भारत ने कहा था कि अफगानिस्तान में भारतीयों पर हमले पाकिस्तान की सेना और आईएसआई करवा रही है। अफगानिस्तान में चलाई जा रही विकासात्मक व अन्य रचनात्मक गतिविधियों के कारण भारत के वहां बढते असर को इसकी वजह बताया गया था।पाकिस्तान भारत के साथ युद्ध की स्थिति में अफगानिस्तान को सामरिक दृष्टि से सुरक्षित क्षेत्र मानता रहा है। अब पाकिस्तान को डर है कि वह खुद को पूर्वी सीमा पर भारत और पश्चिमी सीमा पर भारत समर्थक अफगानिस्तान सरकार से घिरा हुआ महसूस कर सकता है। पाकिस्तान को यह भी डर है कि अफगानिस्तान से सटे उसके पश्तून बहुल इलाके पर काबुल दावा जता सकता है, जिसे अफगानिस्तान दोनों देशों की विधिसम्मत सीमा नहीं मानता है।तालिबान के दावे को भारतीय एजेंसियां पाकिस्तान में बैठे साजिश रचने वालों की पहचान छिपाने की कोशिश मानते हैं। इस धारणा को बल इस बात से मिलता है कि दोनों हमलों का तरीका और चुना गया समय एक जैसे थे। कुछ प्रेक्षकों का मानना है कि हमले का मकसद अफगानिस्तान में अमरीका की रणनीति को प्रभावित करना भी हो सकता है। पाकिस्तान शायद यह संकेत देना चाहता है कि अमरीका यदि पाकिस्तान से सहयोग लेना चाहता है तो उसे भारत के अफगानिस्तान में बढते असर पर अंकुश लगाना होगा। भारत अफगानिस्तान में अपना शांतिपूर्ण असर बढाना चाहता है, जिससे तालिबान के भारत विरोधी मन्सूबों को नाकाम किया जा सके और इस क्षेत्र में इस्लामी कट्टरपंथियों के सम्भावित उभार को रोका जा सके, जो भारत के लिए सुरक्षा की गम्भीर समस्या बन सकता है। हमले का मकसद भारत को डराना और अमरीका को संकेत देना था। विदेश सचिव निरूपमा राव ने हाल ही कहा है कि हमले का निशाना निश्चित रू प से भारतीय दूतावास ही था। उन्होंने कहा कि 7 जुलाई 2008 को दूतावास भवन के बाहर हुए कार बम विस्फोट जैसा ही शक्तिशाली यह विस्फोट भी था। उनका कहना था कि भारत अफगानिस्तान में अपने हितों और अपने कर्मचारियों की हिफाजत के लिए हरसम्भव कदम उठाएगा। अमरीकी राजदूत ने बम विस्फोट को दुखद बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ओबामा भारत की जनता से अमरीका के भारत के प्रति समर्थन और इस बम विस्फोट पर गहरा दुख व्यक्त करते हैं।अफगान विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 'यह हमला नियोजित था और इस पर अमल अफगानिस्तान की सीमाओं से बाहर से किया गया और इसे उसी आतंककारी गुट ने अन्जाम दिया, जिसने जुलाई 2008 में भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमला किया था।' दूसरे शब्दों में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान की तरफ अंगुली उठाई है, हालांकि भारत ने सीधे पाक को दोषी नहीं ठहराया है। भारत और अफगानिस्तान दोनों ही 2008 में हुए हमले के लिए आईएसआई को जिम्मेदार मानते हैं। अफगानिस्तान में चल रही विकास परियोजनाओं पर कार्यरत भारतीय कर्मचारियों पर हुए हमलों के लिए भी दोनों देश आईएसआई को ही जिम्मेदार मानते हैं। अमरीकी अधिकारियों को संदेह है कि 2008 में दूतावास पर हुआ हमला अफगानी आतंककारी सरगना जलालुद्दीन हक्कानी के लोगों ने किया होगा, जिसके आतंककारी पाकिस्तान से सटे अफगानिस्तान के कबाइली इलाकों में अमरीकी सेनाओं से भिडते रहते हैं।इस्लामाबाद में पाक विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि अब्दुल वासित ने बम विस्फोट की निंदा करते हुए कहा है कि आतंककारी वारदातें जब भी हों, हमें इस खतरे को खत्म करने के लिए अपना संकल्प मजबूत करना चाहिए। काबुल में हुए इस विस्फोट में पाकिस्तान का हाथ होने के आरोप को वासित ने 'हास्यास्पद' बताया।काबुल में 17 सितम्बर के बाद यह दूसरा बडा बम विस्फोट था। सत्रह सितम्बर को आत्मघाती बम विस्फोट में इटली के 6 सैनिक और दस अफगान नागरिक मारे गए थे। अफगानिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार ताजा हमले में अफगानिस्तान के दो पुलिस अधिकारी व 15 नागरिक मारे गए और कम से कम 76 लोग घायल हुए हैं। राष्ट्रपति हामिद करजई, अमरीकी दूतावास और संयुक्त राष्ट्र मिशन तीनों ने हमले की कडी भत्र्सना की है। अफगान राजधानी पिछले कुछ दिनों में हुए आत्मघाती हमलों से दहल गई है। इनकी शुरूआत 20 अगस्त को हुए चुनावों के बाद हुई थी। हमलों के निशाने पर आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय सेनाएं और सरकारी प्रतिष्ठान रहते हैं। अमरीकी दूतावास को भी हाल ही निशाना बनाया गया था।अफसर करीम[लेखक भारतीय सुरक्षा सलाहकार परिषद के सदस्य रहे हैं]