Thursday, October 1, 2009

नैतिक पतन

गिरते नैतिक मूल्यों पर सुप्रीम कोर्ट नाराज
नई दिल्ली, एजेंसीFirst Published:01-10-09 10:52 PM
Last Updated:01-10-09 11:00 PM
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उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को न्यायपालिका समेत देश में नैतिक मूल्यों में गिरावट पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और देश के कुछ प्रमुख वकीलों के पैसे से गहरे लगाव के लिए उन्हें आड़े हाथों लिया है।

उच्चतम न्यायालय ने कहा हमारा चरित्र नीचे गिरता जा रहा है। पटना में एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश से उनका बंगला पानी और बिजली की आपूर्ति बंद करने के बाद खाली कराया जा सका। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इतने बड़े पदों पर आसीन लोग अनाधीकृत तरीके से कब्जा जमाए हुए हैं। ऐसे कार्यों में उच्च न्यायपालिका के लोग भी शामिल हैं।

उच्चतम न्यायालय में न्यायमूर्ति बी एन अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति जी एस सिंघवी की पीठ ने कहा कि ईश्वर की कृपा है कि उच्चतम न्यायालय में अभी ऐसा नहीं है। उच्चतम न्यायालय की पीठ ने अनाधिकृत रूप से सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए वीआईपी लोगों से जुड़े मामले पर उस समय नाराजगी व्यक्त की जब अदालत की सहायता के लिए नियुक्त वकील रंजीत कुमार ने सुझाया कि अगर कोई भी व्यक्ति नियत समयसीमा से भीतर परिसर नहीं खाली करते हैं तो उनका पेंशन संबंधी लाभ खत्म कर दिया जाए।

वर्ष 2005 के बाद से ही उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकार को पूर्व केंद्रीय मंत्रियों, न्यायाधीशों, सांसदों, विधायकों एवं उच्च पदस्थ नौकरशाहों जैसे वीआईपी और वीवीआईपी के अनाधिकृत कब्जा हटाने के निर्देश दिए थे। बहरहाल, सरकारी बंगलों पर अनाधिकृत कब्जे से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय ने देश के लोगों में गिरते नैतिक मूल्यों पर तीखी टिप्पणी की और खेद व्यक्त किया कि जब तक हथौड़ा नहीं चलाया जाता जब तक उसके आदेशों का भी पालन नहीं किया जाता है।

पीठ ने कहा कि काम करने के लिए एक नैतिक प्राधिकार होना चाहिए। हमारी सम्पूर्ण व्यवस्था जिम्मेदार है। पूरे समाज को दोषी ठहराया जाना चाहिए।